
Tuesday, April 19, 2016
19 April कोलकाता में अपने छोटे भाई समान मित्र, पंकज जी के घर जाने का समय निकला.. ये वो घर है जहाँ कोलकाता जाने पर मैं रुकता हुँ और पूरा परिवार ऐसा अपनत्व रखता है कि शब्दों में बयान सम्भव नहीं है.. सुंदर संस्कार युक्त इस परिवार के साथ लम्बे अन्तराल के बाद भोजन किया..
पास में एक दुकान में रीडिंग ग्लास लेने गए तो दुकान के बाहर प्रेमियों की फ़ौज मिल गई.. मैंने उनके साथ सेल्फ़ी ली.. बिना कारण कितने ख़ुश हैं ये लोग.. हमसे ज़्यादा..
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